आरिया रोज़ स्कूल से लौटकर माँ को पूछती – “माँ, क्या हम दिल से कुछ नया पैदा कर सकते हैं?”
ज्योति हँसते‑हँसते उत्तर देती – “बेटी, हम तो रोज़ नई उम्मीदें, नई खुशियाँ पैदा करते हैं।”
परन्तु आरिया ने अपनी माँ के चेहरे पर एक हल्का उदासी देखी। वह जानती थी कि माँ के दिल में कुछ “अन्तर‑वासन” की भावना छुपी है – एक ऐसा खालीपन, जिसे वह शब्दों में नहीं बयां कर पा रही थी।
एक सर्दी की सुबह, ज्योति को एक अनपेक्षित रिपोर्ट मिली – उसे स्कूल में पदोन्नति के लिए एक बड़े शहर में प्रबंधन की जिम्मेदारी मिल गई। इस अवसर के साथ ही उसे शहर छोड़कर दो साल तक काम करने का प्रस्ताव भी मिला। mom with daughter story antarvasna hindi
आरिया की आँखों में चमक और माँ के दिल में उलझन।
ज्योति ने सोचा, “अगर मैं चली जाऊँगी तो मेरे बिना इस घर का क्या होगा? क्या मैं अपने अंदर की उस अनकही ‘अन्तर‑वासन’ को कभी पूरा कर पाऊँगी?”
उस रात, जब आरिया ने अपने बेड के नीचे एक छोटा कागज़ का पत्ता फेंका, वह लिखा था – “माँ, मैं तुम्हारे साथ हूँ। हम साथ‑साथ अपनी नई कहानी लिखेंगे।” आरिया बड़ी हुई
साल बीतते‑बीतते, आरिया बड़ी हुई, और उसकी माँ के साथ वह एक छोटे से बगीचे में रोज़ “बीज‑कहानी” लिखती रही।
एक दिन, जब आरिया ने अपनी माँ को एक पत्र लिखा – “माँ, तुमने मुझे सिखाया कि हर माँ के दिल में एक ‘अन्तर‑वासन’ रहता है। वह खालीपन नहीं, बल्कि एक नया जन्म है। तुम्हारे साथ मैं भी खुद को दोबारा जन्म देती हूँ।” एक सर्दी की सुबह
ज्योति ने पत्र पढ़ते‑पढ़ते आँसू बहाए, पर ये आँसू ख़ुशी के थे। वह जान गई थी कि उसकी ‘अन्तर‑वासन’ अब सिर्फ़ एक भावना नहीं, बल्कि दो दिलों की साझा सृष्टि बन गई थी।