Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full -

एक बार एक बूढ़े जैन मुनि अपने शिष्य को लेकर पालीताना पहुँचे। शिष्य ने पूछा- "गुरुदेव! 3500 सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल है। कोई आसान उपाय बताएँ?"

मुनि ने कहा- "बेटा, पाँच चैत्यवंदन ही आसान उपाय है। हर 100 सीढ़ी पर एक वंदन सोचो। पहली में अहंकार छोड़ो, दूसरी में कृतज्ञ बनो, तीसरी में सबको समान देखो, चौथी में दूसरों के लिए प्रार्थना करो, और पाँचवीं में अपने को भगवान में विलीन कर दो।"

शिष्य ने वैसा ही किया। जब वह ऊपर पहुँचा, तो उसे सीढ़ियों का अहसास ही नहीं हुआ। उसने पाया कि पाँच चैत्यवंदन केवल मंत्र नहीं, बल्कि एक योग यात्रा है। palitana 5 chaityavandan in hindi full

भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन पाँच चैत्यवंदन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है।


मूल पाठ:

आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं।

हिंदी अर्थ:

जो मंदिर में विराजमान हैं, जो आसन पर विराजमान हैं, जो खड़े हैं, चारों दिशाओं में स्थित हैं, अथवा छह प्रकार की प्रतिमाओं में स्थित हैं – उन सभी जिनेन्द्रों को मैं नित्य (प्रतिदिन) नमस्कार करता हूँ, वंदना करता हूँ।

एक बार एक बूढ़े जैन मुनि अपने शिष्य को लेकर पालीताना पहुँचे। शिष्य ने पूछा- "गुरुदेव! 3500 सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल है। कोई आसान उपाय बताएँ?"

मुनि ने कहा- "बेटा, पाँच चैत्यवंदन ही आसान उपाय है। हर 100 सीढ़ी पर एक वंदन सोचो। पहली में अहंकार छोड़ो, दूसरी में कृतज्ञ बनो, तीसरी में सबको समान देखो, चौथी में दूसरों के लिए प्रार्थना करो, और पाँचवीं में अपने को भगवान में विलीन कर दो।"

शिष्य ने वैसा ही किया। जब वह ऊपर पहुँचा, तो उसे सीढ़ियों का अहसास ही नहीं हुआ। उसने पाया कि पाँच चैत्यवंदन केवल मंत्र नहीं, बल्कि एक योग यात्रा है।

भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन पाँच चैत्यवंदन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है।


मूल पाठ:

आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं।

हिंदी अर्थ:

जो मंदिर में विराजमान हैं, जो आसन पर विराजमान हैं, जो खड़े हैं, चारों दिशाओं में स्थित हैं, अथवा छह प्रकार की प्रतिमाओं में स्थित हैं – उन सभी जिनेन्द्रों को मैं नित्य (प्रतिदिन) नमस्कार करता हूँ, वंदना करता हूँ।

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